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ओशो ऑडियोबुक: Amrit Ki Disha--अमृत की दिशा (mp3)

 

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Amrit Ki Disha--अमृत की दिशा

ध्यान साधना पर पुणे एवं मुंबई में ओशो द्वारा दिए गए पांच प्रवचन|

‘अमृत की दिशा’ एक बार फिर हमें उस पगडंडी पर से लिए चलती है जो चित्त की स्वततंत्रता, चित्त की सरलता और फिर चित्त की शून्य ता के पड़ाव से होती हुई हमें अपने खोए हुए घर की ओर लौटा लाती है। कुछ भोले-भाले तो कुछ बड़े-बड़े मुद्दों पर उठाए प्रश्न जैसे सत्यत-दर्शन, ईश्वचर-दर्शन, हठयोग जैसे क्लिआष्ठ मुद्दे—और ओशो ने हमारे बीच आकर हमारे तल को समझ कर सभी की चर्चा व समाधान बड़े प्रेम व करुणा से किया है। ओशो का कहना है : ‘परमात्मा कोई व्यक्ति नहीं है जिसको आप खोज लेंगे, परमात्मा: एक आनंद की चरम अनुभूति है, उस अनुभूति में आप कृतार्थ हो जाते हैं, आपमें कृतज्ञता पैदा होती है, वही परम आस्तिहकता है। और ऐसी आस्तिवकता की खोज जो मनुष्यЀ नहीं कर रहा है वह अपने जीवन के अवसर को व्यर्थ खो रहा है’। --ओशो
 
 
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उद्धरण: अमृत की दिशा,पहला प्रवचन
"भगवान को आप सहारा न समझें। और जो लोग भगवान को सहारा समझते होंगे, वे गलती में हैं। उन्हें भगवान का सहारा नहीं उपलब्ध हो सकेगा। कमजोरों के लिए इस जगत में कुछ भी उपलब्ध नहीं होता। और जो शक्तिहीन हैं और जिनमें साहस की कमी है, धर्म उनका रास्ता नहीं है। दिखता उलटा है। दिखता यह है कि जितने कमजोर हैं, जितने साहसहीन हैं, वे सभी धार्मिक होते हुए दिखाई पड़ते हैं। कमजोरों को, साहसहीनों को, जिनकी मृत्यु करीब आ रही है उनको, घबड़ाहट में, भय में धर्म ही मार्ग मालूम होता है। इसलिए धर्म के आस-पास कमजोर और साहसहीन लोग इकट्ठे हो जाते हैं। जब कि बात उलटी है। धर्म तो उनके लिए है, जिनके भीतर साहस हो, जिनके भीतर शक्ति हो, जिनके भीतर बड़ी दुर्दम्य हिम्मत हो और जो कुछ अंधेरे में अकेले बिना प्रकाश के चलने का दुस्साहस कर सकें।
तो यह मैं प्राथमिक रूप से आपसे कहूं। दुनिया में यही वजह है कि जब से कमजोरों ने धर्म को चुना है, तब से धर्म कमजोर हो गया। और अब तो सारी दुनिया में कमजोर ही धार्मिक हैं। जिनमें थोड़ी सी हिम्मत है, वे धार्मिक नहीं हैं। जिनमें थोड़ा सा साहस है, वे नास्तिक हैं। और जिनमें साहस की कमी है, वे सब आस्तिक हैं।
भगवान की तरफ सारे कमजोर लोग इकट्ठे हो गए हैं, इसलिए दुनिया में धर्म नष्ट होता चला जा रहा है। इन कमजोरों को भगवान तो बचा ही नहीं सकता, ये कमजोर भगवान को कैसे बचाएंगे? कमजोरों की कोई रक्षा नहीं है, और कमजोर तो किसी की रक्षा कैसे करेंगे?
सारी दुनिया में मनुष्य के इतिहास के इन दिनों में, इन क्षणों में, जो धर्म का अचानक ह्रास और पतन हुआ है, उसका बुनियादी कारण यही है।
तो मैं आपको कहूं: अगर आपमें साहस हो, तो ही धर्म के रास्ते पर चलने का मार्ग खुलता है। न हो, तो दुनिया में बहुत रास्ते हैं। धर्म आपके लिए नहीं हो सकता।
तो जो आदमी भय के कारण भयभीत होकर धर्म की तरफ आता हो, वह गलत आ रहा है। लेकिन सारे धर्म-पुरोहित तो आपको भय देते हैं--नरक का भय, स्वर्ग का प्रलोभन, पाप-पुण्य का भय और प्रलोभन, और घबड़ाहट पैदा करते हैं। वे घबड़ाहट के द्वारा आपमें धर्म का प्रेम पैदा करना चाहते हैं। और यह आपको पता है, भय से कभी प्रेम पैदा नहीं होता। और जो प्रेम भय से पैदा होता है, वह एकदम झूठा होता है, उसका कोई मूल्य नहीं होता। आप भगवान से डरते हैं, तो आप नास्तिक होंगे, आस्तिक नहीं हो सकते।" --ओशो
 

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