ग्रंथ
- also available as a ऑडियोपुस्तकें Series

गीता-दर्शन  भाग तीन - पुस्तकें

 

Availability: In stock

रु. 330.00
मोल  

गीता-दर्शन भाग तीन - Gita Darshan, Vol.3

श्रीमद्भगवद्गीता के अध्याय छह ‘आत्म-संयम-योग’ एवं अध्याय सात ‘ज्ञान-विज्ञान-योग’ पर अहमदाबाद तथा क्रास मैदान, मुंबई में प्रश्नोत्तर सहित हुई प्रवचनमाला के अंतर्गत ओशो द्वारा दिए गए इकत्तीस प्रवचन

" कृष्ण जैसे व्यक्ति की करुणा अपरिसीम है। यह जानते हुए कि हम सुनकर भी नहीं समझ पाएंगे, हम देखकर भी नहीं समझ पाएंगे, फिर भी एक असंभव प्रयास कृष्ण जैसे लोग करते हैं। उनकी वजह से जिंदगी में थोड़ा नमक है, उनकी वजह से जिंदगी में थोड़ी रौनक है, जिन्होंने असंभव प्रयास किया।"—ओशो

इस पुस्तक में गीता के छठे व सातवें अध्याय--आत्म-संयम-योग व ज्ञान-विज्ञान-योग- तथा विविध प्रश्नों व विषयों पर चर्चा है।


कुछ विषय बिंदु:


  • अंतर्यात्रा का विज्ञान

  • योग का अंतर्विज्ञान

  • दुख-सुख में अविचलित रहने की कला

  • अदृश्य की खोज

  • कार्य-कारण के जाल से मुक्ति
  •  
     
    पुस्तकें - विवरण सामग्री तालिका
     
    OSHO Media International
    488
    978-81-7261-120-0
        अनुक्रम
        #1: अध्याय-6
        कृष्ण का संन्यास, उत्सवपूर्ण संन्यास
        आसक्ति का सम्मोहन
        मालकियत की घोषणा
        ज्ञान विजय है
        ह्रदय की अंतर-गुफा
        अंतर्यात्रा का विज्ञान
        अपरिग्रही चित्त
        योगाभ्यास-गलत को काटने के लिए
        योग का अंतर्विज्ञान
        चित्त वृत्ति निरोध
        दुखों में अचलायमान
        मन साधना बन जाए
        पदार्थ से प्रतिक्रमण-परमात्मा पर
        अहंकार खोने के दो ढंग
        सर्व भूतों में प्रभु का स्मरण
        मन का रूपांतरण
        वैराग्य और अभ्यास
        यह किनारा छोडें
        आंतरिक संपदा
        श्रद्धावान योगी श्रेष्ठ है
        #2: अध्याय-7
        अनन्य निष्ठा
        परमात्मा की खोज
        अदृश्य की खोज
        आध्यात्मिक बल
        प्रकृति और परमात्मा
        जीवन अवसर है
        मुखौटों से मुक्ति
        श्रद्धा का सेतु
        निराकार का बोध
        धर्म का सार : शरणागति
     
     
    मूल्य सूची: रु. 330.00
     
    उद्धरण: गीता-दर्शन भाग तीन, योगाभ्यास--गलत को काटने के लिए

    "कृष्ण एक बहुत वैज्ञानिक तथ्य की बात कर रहे हैं। सानुपात व्यक्तित्व चाहिए, अनुपातहीन नहीं। अनुपातहीन व्यक्तित्व अराजक, केओटिक हो जाएगा। उसके भीतर की जो लयबद्धता है, वह विश्रृंखल हो जाएगी, टूट जाएगी। और टूटी हुई विश्रृंखल स्थिति में, ध्यान में प्रवेश आसान नहीं होगा। आपने अपने ही हाथ से उपद्रव पैदा कर लिए हैं और उन उपद्रवों के कारण आप भीतर न जा सकेंगे। और हम सब ऐसे उपद्रव पैदा करते हैं, अनेक कारणों से; वे कारण खयाल में ले लेने चाहिए।

    पहला तो इसलिए उपद्रव पैदा हो जाता है कि हम इस सत्य को अब तक भी ठीक से नहीं समझ पाए हैं कि अनुपात प्रत्येक व्यक्ति के लिए भिन्न होगा। इसलिए हो सकता है कि पिता की नींद खुल जाती है चार बजे, तो घर के सारे बच्चों को उठा दे कि ब्रह्ममुहूर्त हो गया, उठो। नहीं उठते हो, तो आलसी हो।

    लेकिन पिता को पता होना चाहिए, उम्र बढ़ते-बढ़ते नींद की जरूरत शरीर के लिए रोज कम होती चली जाती है। तो बाप जब बहुत ज्ञान दिखला रहा है बेटे को, तब उसे पता नहीं कि बेटे की और उसकी उम्र में कितना फासला है! बेटे को ज्यादा नींद की जरूरत है।…बच्चा पैदा होने के बाद तेईस घंटे सोता है, बाईस घंटे सोता है, बीस घंटे सोता है, अठारह घंटे सोता है। उम्र जैसे-जैसे बड़ी होती है, नींद कम होती चली जाती है।

    इसलिए बूढ़े कभी भूलकर बच्चों को अपनी नींद से शिक्षा न दें। अन्यथा उनको नुकसान पहुंचाएंगे, उनके अनुपात को तोड़ेंगे। लेकिन बूढ़ों को शिक्षा देने का शौक होता है। बुढ़ापे का खास शौक शिक्षा देना है, बिना इस बात की समझ के।

    इसलिए हम बच्चों के अनुपात को पहले से ही बिगाड़ना शुरू कर देते हैं। और अनुपात जब बिगड़ता है, तो खतरा क्या है?

    अगर आपने बच्चे को कम सोने दिया, जबर्दस्ती उठा लिया, तो इसकी प्रतिक्रिया में वह किसी दिन ज्यादा सोने का बदला लेगा। और तब उसके सब अनुपात असंतुलित हो जाएंगे। अगर आप जीते, तो वह कम सोने वाला बन जाएगा। और अगर खुद जीत गया, तो ज्यादा सोने वाला बन जाएगा। लेकिन अनुपात खो जाएगा।

    अगर मां-बाप बलशाली हुए, पुराने ढांचे और ढर्रे के हुए, तो उसकी नींद को कम करवा देंगे। और अगर बच्चा नए ढंग का, नई पीढ़ी का हुआ, उपद्रवी हुआ, बगावती हुआ, तो ज्यादा सोना शुरू कर देगा। लेकिन एक बात पक्की है कि दो में से कोई भी जीते, प्रकृति हार जाएगी; और वह जो बीच का अनुपात है, वह सदा के लिए अस्तव्यस्त हो जाएगा।"—ओशो

     

    Email this page to your friend